रिटायरमेंट नहीं ले रहीं लता मंगेशकर, कहा- आखिरी सांस तक गाऊंगी
दरअसल, सोशल मीडिया पर लता का गाया मराठी गाना 'अता विश्व्याछा कसां' पोस्ट किया गया. जिसका अर्थ है 'अब आराम का समय है'. इस गाने को लता मंगेशकर की रिटायरमेंट से जोड़कर देखा जाने लगा. मगर अब सिंगर ने ऐसी खबरों को फर्जी करार देकर फैंस को खुश कर दिया है.
लता ने एक खास बातचीत में कहा, "मुझे नहीं पता कि यह अफवाह किसने शुरू की और क्यों? मुझे यह किसी खाली बैठे बेवकूफ आदमी का काम लगता है. दो दिन पहले मुझे अचानक मेरी रिटायरमेंट को लेकर संदेश और फोन आने शुरू हो गए."
उन्होंने कहा, "मुझे पता चला कि मेरे मराठी गीतों में से एक 'अता विश्व्याछा कसां' को मेरे अलविदा गीत के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन मैंने पांच साल पहले उस गीत को गाया था. 2013 में इस गीत को लेकर संगीत निर्देशक सलील कुलकर्णी मेरे पास आए. मैं इसे मुख्य रूप से गाने पर सहमत हुई क्योंकि यह प्रसिद्ध कवि बालकृष्ण भगवंत बोरकर ने लिखा था. मैंने कभी उनकी कविता नहीं गाई थी. मुझे क्या पता था कि पांच साल बाद शरारती दिमाग वाले लोग इसे मेरी रिटायरमेंट से जोड़ेंगे."
अयोध्या का साधू बन गया सासंद
अयोध्या आंदोलन के चेहरे के तौर राम विलास वेदांती का नाम भी आता है. अयोध्या के बड़े साधुओं में नाम आता है. राम मंदिर आदोलन ने वेदांती को राजनीतिक पहचान दी और वो बीजेपी सांसद बने थे. मौजूदा समय में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे है, लेकिन बीजेपी और सरकार में हाशिये पर हैं.
इसके अलावा बाबरी विध्वंस के दौरान राजमाता विजयराजे सिंधिया भी अयोध्या में मौजूद थीं, लेकिन उनका निधन हो चुका है. इसके अलावा स्वामी चिन्मयानंद भी अयोध्या आंदोलन के बड़े चेहरे थे, लेकिन मौजूदा समय में बीजेपी और सराकर- दोनों में कोई भूमिका नहीं है.
लता ने एक खास बातचीत में कहा, "मुझे नहीं पता कि यह अफवाह किसने शुरू की और क्यों? मुझे यह किसी खाली बैठे बेवकूफ आदमी का काम लगता है. दो दिन पहले मुझे अचानक मेरी रिटायरमेंट को लेकर संदेश और फोन आने शुरू हो गए."
उन्होंने कहा, "मुझे पता चला कि मेरे मराठी गीतों में से एक 'अता विश्व्याछा कसां' को मेरे अलविदा गीत के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन मैंने पांच साल पहले उस गीत को गाया था. 2013 में इस गीत को लेकर संगीत निर्देशक सलील कुलकर्णी मेरे पास आए. मैं इसे मुख्य रूप से गाने पर सहमत हुई क्योंकि यह प्रसिद्ध कवि बालकृष्ण भगवंत बोरकर ने लिखा था. मैंने कभी उनकी कविता नहीं गाई थी. मुझे क्या पता था कि पांच साल बाद शरारती दिमाग वाले लोग इसे मेरी रिटायरमेंट से जोड़ेंगे."
अयोध्या का साधू बन गया सासंद
अयोध्या आंदोलन के चेहरे के तौर राम विलास वेदांती का नाम भी आता है. अयोध्या के बड़े साधुओं में नाम आता है. राम मंदिर आदोलन ने वेदांती को राजनीतिक पहचान दी और वो बीजेपी सांसद बने थे. मौजूदा समय में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे है, लेकिन बीजेपी और सरकार में हाशिये पर हैं.
इसके अलावा बाबरी विध्वंस के दौरान राजमाता विजयराजे सिंधिया भी अयोध्या में मौजूद थीं, लेकिन उनका निधन हो चुका है. इसके अलावा स्वामी चिन्मयानंद भी अयोध्या आंदोलन के बड़े चेहरे थे, लेकिन मौजूदा समय में बीजेपी और सराकर- दोनों में कोई भूमिका नहीं है.
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